Bal Vikas -6

बाल विकास प्रश्नोत्तरी - सेट 6

बाल विकास प्रश्नोत्तरी - सेट 7

बाल विकास के महत्वपूर्ण पहलुओं की अपनी समझ का परीक्षण करें

बाल विकास के विभिन्न आयामों की अपनी समझ को परखने के लिए इस प्रश्नोत्तरी को हल करें। सही उत्तर चुनें और अपने ज्ञान का मूल्यांकन करें।

1. सीखने की प्रक्रिया का आधार क्या है?
  • (a) अनुकरण
  • (b) स्मृति
  • (c) ध्यान
  • (d) अभ्यास
सीखने की प्रक्रिया का आधार अनुकरण है। बच्चे अपने आस-पास के वातावरण, माता-पिता, शिक्षकों और साथियों के व्यवहार का अनुकरण करके सीखते हैं। अल्बर्ट बंडूरा के सामाजिक अधिगम सिद्धांत के अनुसार, अनुकरण सीखने का एक प्रमुख माध्यम है जिसके द्वारा बच्चे नए व्यवहार, कौशल और मूल्य सीखते हैं।
2. बालक की सर्वांगीण वृद्धि किससे होती है?
  • (a) खेलकूद
  • (b) दंड
  • (c) परीक्षा
  • (d) मौन
बालक की सर्वांगीण वृद्धि खेलकूद से होती है। खेल के माध्यम से बच्चे का शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक और संज्ञानात्मक विकास होता है। खेल बच्चों को सहयोग, नेतृत्व, समस्या-समाधान और रचनात्मकता जैसे गुणों को विकसित करने में मदद करता है।
3. "अधिगम" का अर्थ है –
  • (a) ज्ञान अर्जन
  • (b) केवल रटना
  • (c) अनुकरण
  • (d) केवल परीक्षा देना
"अधिगम" का अर्थ है ज्ञान अर्जन। यह एक सक्रिय प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति अनुभव, अभ्यास, अवलोकन या शिक्षण के माध्यम से नए ज्ञान, कौशल, मूल्यों और व्यवहारों को प्राप्त करता है। अधिगम जीवन पर्यंत चलने वाली प्रक्रिया है जो व्यक्ति के व्यवहार में स्थायी परिवर्तन लाती है।
4. किस आयु को "खेल आयु" कहा जाता है?
  • (a) 2 से 6 वर्ष
  • (b) 12 से 18 वर्ष
  • (c) 18 से 25 वर्ष
  • (d) 25 से 30 वर्ष
2 से 6 वर्ष की आयु को "खेल आयु" कहा जाता है। इस अवस्था में बच्चे खेलों में सबसे अधिक रुचि लेते हैं और खेल के माध्यम से ही सीखते हैं। इस उम्र में बच्चों का शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास खेल गतिविधियों के माध्यम से तीव्र गति से होता है।
5. पियाजे के अनुसार संज्ञानात्मक विकास की प्रथम अवस्था है –
  • (a) संवेदीगत-प्रेरक अवस्था
  • (b) पूर्व संक्रियात्मक अवस्था
  • (c) ठोस संक्रियात्मक अवस्था
  • (d) औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था
पियाजे के अनुसार संज्ञानात्मक विकास की प्रथम अवस्था संवेदीगत-प्रेरक अवस्था (Sensorimotor Stage) है जो जन्म से 2 वर्ष तक चलती है। इस अवस्था में शिशु अपनी इंद्रियों (देख, सुन, छू, सूंघ और चख) और शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से दुनिया को समझता है। इस अवस्था की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि वस्तु स्थायित्व (object permanence) का विकास है।

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